फेडरर, नडाल की तरह जोकोविच पर क्यों नहीं हो सकते फैन्स फिदा?

no photo
 |

© Getty

फेडरर, नडाल की तरह जोकोविच पर क्यों नहीं हो सकते फैन्स फिदा?

हर किसी की अपनी पसंद होती है। जो कभी भी किसी खेल से दिल से जुड़े हो, अकेले भी खेल देखे तो तन्हाई महससू ना हो, ऐसे खेल प्रेमियों का कोई ना कोई एक अजीज खिलाड़ी होता है। एक फेवरेट जिन्हें वो दिल से चाहते हैं और जिनके लिए दूसरों से लड़ भी जाते हैं।

स समय जब टीवी के सामने अपनी मुट्ठी बंद किए हुए या कुछ भी बड़बड़ाते हुए बुद्वू बक्से को बंद कर देते हैं, किसी मैच प्वाइंट पर सांसे फूल जाने तक चीखना-चिल्लाना, अपना मुंह छुपा लेना ताकि कोई आंखों से गिरता आंसू ना देख ले।

जब मैं 12 या 13 साल का था तब मेरा भी कुछ ऐसा ही खेल अनुभव रहा जो खेल नहीं एक शर्मिंदगी थी। 1999 में जब द राॅक रेसलमेनिया हारे, तब मैं अपनी आंखों को भीगने से रोक नहीं पाया, मुझे यकीन है कि ये खून में नहाया हुआ एक ऐतिहासिक मैच था। 9 साल बाद, 2008 विबंलडन के फाइनल में ऐसा ही पल दोबारा आया।

जब मैं इन दोनों व्यक्तियों पर निगाह डालता हूं तो लगता है कि दोनों में दूर से भी कोई समानता नहीं है। शुरूआत करें तो एक महानतम खिलाड़ियों में से एक है और वहीं दूसरा स्टेराॅयड लेकर लोगों का मनोरंजन कर रहा है। हालांकि जब मैं समानताएं खोजता हूं तो मुझे कुछ प्राप्त नहीं होता। फेडरर एक आत्मसंयमी और खेल के माहिर थे जबकि राॅक रेस्लिंग प्रतियोगिताओं में कुछ ज्यादा ही मनोरंजक थे। फेडरर एक स्वलंबी शासक था तो वहीं शो के निर्माताओं ने हमेशा उसे अंडरडाॅग बनाया।

मेरे ख्याल से हम अपने पसंदीदा खिलाड़ी स्वयं नहीं चुनते, बस उन्हें पसंद करते हैं और इसके लिए कभी कोई कारण, या तो तर्क से बिल्कुल हटा कर दिए जाते हैं या फिर कारणों को ही बदल दिया जाता है।

अब तक नोवाक जोकोविच को महानायकों के साथ स्थान क्यों नहीं दिया गया है ये किसी रहस्य से कम नहीं है। मैं खुद फेडरर के प्रशंसकों में से एक हूं लेकिन फिर भी मेरे अंदर नोवाक की जड़े तब से हैं जब उनके पास 2-3 स्लैम खिताब ही थे।

जो व्यक्ति इतना दयालु है कि अपनी छतरी बाॅल बाॅय के साथ साझा करने में नहीं शरमाते, वो इतने अलग हैं कि उन्होंने अपने मजाकिया बरताव से मारिया शारापोवा को चिढ़ा दिया था। वो इतने दोस्ताना हैं कि शायद वो अपना बीयर भी आपके साथ साझा कर लेंगे। दरअसल उन्हें सभी में से सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। ऐसी शख्सियत वाले लड़के लिए महान बनना बिल्कुल मुश्किल नहीं था।

कई सिद्धांत खेलप्रेमियों की मनोवृति में बसे हुए हैं, जिसका वर्णन और अनुमान लगाने की कोशिश उनके द्वारा हुई। कुछ ने तो तीनों खिलाड़ियों में शारीरिक खूबियों का सीमांकन करने का भी प्रयास किया। जोकोविच का अनोखापन और उनकी मिलनसारत उन्हें पसंदीदा बनाती है लेकिन ‘प्यारा’ नहीं।

आखिरी क्षणों में रणनीति बनाने के लिए समय लेने वाले जोकोविच को टेनिस का ड्रामा क्वीन माना जाता है। उनके एक अच्छे दोस्त माने जाने वाले एंडी मरे से जब 2015 के आॅस्ट्रेलियन ओपन के दौरान टाइम आउट के बारे में पूछा गया तब वो कहते हैं कि ‘‘उनके बारे में चिंता मत करो। वो हर बार ऐसा ही करेगा।’’ राॅड जो कि इतने व्यवहार कुशल नहीं है, से जब ये प्रश्न पूछा गया तब वो इससे बचते नजर आए।

दोनों में से किसी ने भी इस प्रश्न का उत्तर सही तरीके से नहीं दिया इसलिए अब में इस पर अपने सिद्धांत नम्रतापूर्वक एक सटीक क्रम में आगे रखूंगा।

एक लंबे समय के खेल के बावजूद जब एक खिलाड़ी का एक-एक मूव, एक-एक रिकाॅर्ड के आंकड़ों की समीक्षा की जाती है तो उसकी महानता धुंधली और हल्की हो जाती है। यद्यपि किसी खिलाड़ी की महानता को बयां करने का एक पहलू यह है कि वह किस प्रकार के विपक्ष का सामना कर रहा है और उससे जीत रहा है। मोहम्मद अली के पास फ्रेजियर, माइकल जाॅर्डन के पास मैजिक जाॅनसन और रोजर फेडरर के पास राफेल नडाल है। इन सबकी अपनी-अपनी कहानी है जिससे पता चलता है कि वो अपनी शुरूआती विफलताओं से ऐसे उबरे हैं जैसे कोई राख से उभरता है। साथ ही ये इस बात पर विश्वास रखते हैं कि जो इनके लिए सही है वो उसे लेकर रहेंगे (हालांकि फेडरर ऐसे प्रतीत होते हैं जिन्होंने नडाल पर पूर्णतया जीत पा ली हो)। किसी की महान तस्वीर बनाने के लिए सही तानेबाने की जरूरत होती है लेकिन जोकोविच के करियर में एंडी मरे और स्आन वावरिंका जैसे रंग केवल धब्बों के रूप में हैं। अपने करियर का एक लंबा समय स्विस और स्पेनियार्ड की छत्रों-छाया में गुजारने वाले जोकोविच की कोई गलती नहीं है कि उन्हें एंडी और वावरिंका का साधारण-सा साथ मिला। फेडरर 30 के पार हैं और नडाल अपनी चोटों से परेशान हैं इसलिए दोनों ही कोई मदद नहीं कर सकते।

इसके अतिरिक्त जोकोविच कोई कलाकार नहीं है जो अपनी महानता का कोई चित्र स्वयं बना ले, जैसे फेडरर ने खुद अपने रैकेट की सरसराहट से अपना एक संगीत बनाया है। जोकोविच के लिए कभी कोई मिसाल नहीं लिखी गई, ना ही कभी किसी खेल एक्सपर्ट ने अपने आपको उनकी घटनाओं से खुद को जोड़ा।

निश्चय ही जोकोविच अवास्तविकता के उपर सत्यता को दर्शाते हैं। राफा की तुलना में वो उनसे भी कहीं अधिक जोरदार तरीके से बेसलाईन हिट को अपने खेल में शामिल करते हैं, इन सब के बावजूद भी चोटों से बचे रहने का श्रेय वे अपनी अमानवीय शारीरिक क्षमता को देते हैं।

वो अविवादास्पद रूप से एक महान खिलाड़ी हैं लेकिन जिस प्रकार रोजर का रहस्यवाद पर नियंत्रण है, वैसा शायद इनके पास नहीं है। इन्होंने कभी भी खेल को उस तरीके से रूपांतरित नहीं किया जैसा स्विस खिलाड़ी ने किया।

उनके प्रसिद्ध ना होने के पीछे एक महत्वपूर्ण कारण यह भी हो सकता है कि शायद हम ही आगे ना बढ़े हों या हमने ही अपनी सहमति नहीं दी। बचपन में रोजर फेडरर उसी अनिच्छुक स्कूल के बच्चे की भांति थे जिसे फुटबाॅल के अभ्यास सत्र के बाद रोका जाता था। लेकिन अब उनका अपने खेल के प्रति प्रेम तब-तब दिखाई देता है जब-जब वो खिताब को जीतने के लिए कोर्ट में उतरते हैं। वहीं दूसरी तरफ राफेल नडाल की वापसी बिल्कुल भी आसान नहीं थी। पहली बार भले ही उन्होंने कुछ खास ना किया हो लेकिन वापसी उन्होंने खिताब जीतकर की और वहीं दूसरी बार वे काफी कम अंतर से अपना ओलंपिक मेडल चूक गए।

जोकोविच भले ही नडाल या फेडरर के रिकाॅर्ड की बराबरी कर ले लेकिन उन्हें कभी वो प्यार नहीं मिल सकता जो उन दोनों को मिलता है, कम से कम आने वाले कुछ समय में तो नहीं।

Now play Cricket, Football, Tennis, Badminton and Kabaddi - all in one go.

Presenting Nostragamus, the first ever prediction game that covers all sports. Play Daily Sports challenge and win cash prizes daily!

Download the app for FREE and get Rs.20 joining BONUS. Join 30,000 other users who win cash by playing NostraGamus. Click here to download the app for FREE on android!

SHOW COMMENTS