लीएंडर ने दिया करारा जवाब: कोई मुझपर ऊँगली नहीं उठा सकता, मैंने सब कुछ हासिल किया है

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© Leander Paes Twitter

लीएंडर ने दिया करारा जवाब: कोई मुझपर ऊँगली नहीं उठा सकता, मैंने सब कुछ हासिल किया है

भारतीय टेनिस के जगत में इस वक़्त माहौल काफी गर्म है, और दिन-ब-दिन हालात ख़राब होते जा रहे हैं। ताज़ा विवादित मामले में, लीएंडर पेस ने उनके 'अत्यंत द्वेषी' प्रतिद्वंदी, यानी रोहन बोपन्ना और सानिया मिर्ज़ा को उनकी छवि बिगाड़ने और उनके सार्वजनिक तौर पर एक 'बुरा आदमी' बनाने का आरोप लगाया है।

"अपने कार्यकाल के पड़ाव पर, मेरे अधिकतर प्रतिद्वंदी अत्यंत द्वेषी हैं। वे शायद यह नहीं समझ सकते कि 18 ग्रैंड स्लैम जीतने और सात ओलंपिक्स खेलने में कितनी मेहनत लगती है। कुछ प्रतिद्वंदी ऐसे भी है जिन्हें अगर 10 जन्म भी मिल जाए, तो वे ऐसा कुछ नहीं कर पाएंगे। मेहनत करने के बजाय वे मेरी छवि ख़राब कर रहे हैं", पेस ने पीटीआई से एक इंटरव्यू में कहा। 

"वे गलत तरीके अपनाकर मेरी ख्याति को नुक्सान पहुँचाना चाहते हैं, ताकि लोगों के बीच ये बात फ़ैल जाए की लीएंडर एक बुरा आदमी है। पूरी ज़िन्दगी लग जाती है ऐसी ख्याति बनाने में और कुछ ही सेकंड लगते हैं इसे बिगाड़ने में", उन्होंने कहा। 

हाल ही में स्पेन में हुए डेविस कप खेलकर वापस आने के बाद, पेस ने विवाद की शुरुआत यह कहकर की कि भारत रियो ओलंपिक्स में हुए मिश्रित डबल्स में 'बेहतरीन टीम को खिला नहीं पाया'। इसके बाद, इस विवाद को और तूल मिला जब सानिया मिर्ज़ा और रोहन बोपन्ना ने ट्विटर पर पेस के इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया ज़ाहिर की। मिर्ज़ा ने पेस को एक 'ज़हरीला इंसान' करार दिया, जबकि बोपन्ना ने कहा वह हमेशा दूसरों पर टिप्पणी करते रहते हैं ताकि खुद ख़बरों में रह सके। हालांकि इसके तुरंत बाद पेस ने अपनी प्रतिक्रिया सामने ना रखने का फैसला किया।

"मैं एक इंसान हूँ। लेकिन मैं तुरंत किसी चीज़ पर प्रतिक्रिया नहीं रखता।"

सोशल मीडिया के आधुनिक युग में, मैं समझ सकता हूँ कि नकारात्मकता होना लाजिमी है। जो लोग सच्चे और इमानदार हैं, वह मेरे साथ अच्छा व्यवहार करे या ना करे, मैं उनका सम्मान करता हूँ।"

"कुछ लोग मेरी ख्याति को हमेशा ख़राब करने की कोशिश में रहते हैं। मेरे कुछ प्रतिद्वंदी हैं जो मेरी उपलब्धियों से बेहद जलते हैं। इन उपलब्धियों को पाने के लिए मेहनत करने के बजाय, वो ये मान लेते हैं कि हम इतनी मेहनत नहीं कर सकते लिहाज़ा इनकी ख्याति को नष्ट की जाये। कोई एक कहानी कहीं बताएगा और दूसरी कहीं और, और बस धारणा बन जाएगी।", उन्होंने पीटीआई से कहा  

पेस का मानना है कि नफरत करने वालों का अनदेखा करना ही अच्छा है। उन्होंने कहा, "नफरत करने वालों के बारे में फिक्र नहीं करनी चाहिए। अपना काम करते रहना चाहिए। अपने रास्ते पर चलते रहना चाहिए, दूसरों के रास्ते नहीं आना चाहिए। मैं अपना नाम इतिहास के किताबों में दर्ज कर जाऊंगा और यही मेरी मेहनत का फल है।"

"लोग माने या ना माने, मीडिया लिखे या ना लिखे, लेकिन जो बुद्धिमान हैं, जो ज्ञानी हैं वो इतिहास का किताब उठाएंगे और मेरा नाम उसमें कई बार लिखा गया है और आगे भी लिखा जायेगा। इसे आप बदल नहीं सकते, आप इतिहास को झुठला नहीं सकते, आप इतिहास के किताब को बदल नहीं सकते।"

"आज के आधुनिक युग में प्रसिद्ध होने के होड़ में हर कोई नायक बनना चाहता है। लोग बोलते हैं तो बोलते रहे, वो खुद ही बुरे लगेंगे। मैं तो अपने रास्ते पर चलता रहूँगा। जब तक कोई कनिष्ट आकर ये न कहे, 'ली मैं आपको हर बार हरा रहा हूँ', जब तक मैं ग्रैंड स्लैम जीतना रहूँगा, मैं खेलता रहूँगा। मुझे ये मेहनत करके हासिल करना पड़ा, दूसरों को भी यही करना होगा"

"मैं अपने निजी ज़िन्दगी में सफल रहा हूँ लेकिन कुछ लोग ऐसे मिले हैं जो लालची थे। नम्र होना फायेदेमंद है। लेकिन खासकर भारत में कभी कभी आपको सख्त होना पड़ता है। जब आप एक पायदान पर पहुँच जाते हैं, तो लोग आपके नर्म होने का गलत फायेदा उठाते हैं। मैंने यह अपने जीवन में सीखा है कि आपको लोगों के साथ सख्त होना चाहिए। मेरी अंतरात्मा साफ़ है।"

पेस ने ये बात भी कही कि पुरुष डबल तथा मिश्रित डबल खेलने के लिए उन्हें प्रति वर्ष रु. 3 करोड़ देने पड़ते हैं। 43 वर्षीय इस खिलाड़ी ने कहा कि टेनिस खेलते रहने से अधिक फायेदेमंद उनके लिए कमेंटरी करना और प्रवचन देना है।

"दरअसल पुरुष डबल और मिश्रित डबल खेलकर मुझे नुक्सान होता है। जब भी मैं जनवरी में कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत करता हूँ तो कोच के साथ यात्रा करने के खर्चे के कारण मुझे पता रहता है कि साल भर में मैं 250,000 से 300,000 डॉलर खर्च करूँगा। मैं एक साल में रु. 3 करोड़ खर्च करता हूँ। हमारा कोई संगठन नहीं है जो हमें पैसे देता है नाही हमें कोई वेतन मिलता है।" 

"महीने के अंत में आपके पास पैसे ज़रूर होते हैं, फिर चाहे उस महीने आपकी एड़ी चोटिल हो जाए या आपको तबियत ख़राब हो जाए। लेकिन इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि मुझे मेरे पैसे वापस मिलेंगे या नहीं। सिंगल्स और डबल के बीच पुरस्कार राशि में ज़मीन और आसमान का फर्क है। डबल्स में आपको जीती हुई राशि बांटनी पड़ती है।

"अगर मैंने खेलना छोड़ दिया और भारत में रहकर कमेंटरी करने लगा, प्रवचन देने लगा या अपनी अकादमी खोल लिया, जो मैं मेरी क्षमता के समाप्त हो जाने पर करूँगा, तो वो मेरे लिए ज्यादा फायेदेमंद साबित होगा। मैं फैशन क्लोथिंग में हूँ और पिछले दो सालों में मैंने अपनी क्लोथिंग कंपनी खोली है। तो अगर मैंने खेलना छोड़ दिया तो, एक तो मेरे रु. 3 करोड़ खर्च होने से बचेंगे और दूसरा मैं घर पर रहूँगा। यह बहुत अधिक फायेदेमंद होगा। लेकिन मैं फिर भी हार नहीं मान रहा। अगर मैं 2-3 ग्रैंड स्लैम जीत लूं तो ही मुझे पैसे वापस मिलेंगे। मैं खेल रहा हूँ क्योंकि मुझे ये करना पसंद है," पेस ने कहा। पेस ने यह आश्वासन दिया है कि अगले साल उनकी रैंकिंग काफी बेहतर होगी। 

"चाहे लोग जो कहे, टेनिस खेलने का अधिकार मैंने मेहनत करके हासिल किया है"

"कोई मुझपर ऊँगली नहीं उठा सकता। मैंने सब कुछ हासिल किया है। अगले साल आप देखना (कैसे रैंक बेहतर होते हैं)", उन्होंने इंटरव्यू समाप्त करने से पहले पीटीआई से कहा।

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