स्टेन वावरिंका ने अपनी कामयाबी का श्रेय जोकोविच के नाम किया; कहा उन्हें चेन्नई में खेलना है पसंद

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स्टेन वावरिंका ने अपनी कामयाबी का श्रेय जोकोविच के नाम किया; कहा उन्हें चेन्नई में खेलना है पसंद

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SportsCafe Desk

09/23/2016

यूएस ओपन विजेता स्टेन वावरिंका ने अपनी सफलता का श्रेय विश्व के न. 1 खिलाड़ी नोवाक जोकोविच को दिया है। स्विस खिलाड़ी के अनुसार नोवाक के साथ खेलने से वह अपनी सीमा को बढ़ा पाते हैं और खुद पर एक बेहतर प्रदर्शन के लिए जोर डाल पाते हैं। 31 वर्षीय ने चेन्नई में उमड़ी भीड़ के लिए अपने प्रेम को प्रकट किया है।

"फाइनल के बाद मैंने अपने भाषण में कहा था कि नोवाक ही वह कारण है जिसकी वजह से मैं यहाँ हूँ। उनके खिलाफ खेलने के लिए मुझे बेहतर प्रदर्शन करना पड़ता है, अपनी सीमाओं को आगे बढ़ानी पड़ती है, जोखिम उठाने पड़ते हैं और जितना संभव, उतना अच्छा खेलना पड़ता है। अगर आप तुलना करेंगे तो आपको पता चलेगा कि वह मुझसे काफी आगे हैं। लेकिन किसी न किसी तरह से मैं कई बड़े मौकों पर उनके साथ बेहतर टेनिस खेल पाता हूँ, खेल में टिक पाता हूँ और मेलबोर्न, पेरिस और अब न्यू यॉर्क में हुए बड़े खेलों में जीत हासिल कर पाता हूँ," यूएस ओपन के फाइनल में नोवाक को हराकर तीसरा ग्रैंड स्लैम अपने नाम करने वाले वावरिंका ने टीओआई से एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा।

इस स्विस खिलाड़ी के नाम नोवाक के विरुद्ध फाइनल में प्रदर्शन का एक प्रशंसनीय रिकॉर्ड है। जब उनसे पूछा गया कि क्या रॉजर उनसे विश्व के सर्वोच्च खिलाड़ी को हारने के तरीकों पर सुझाव लेंगे तो वावरिंका ने कहा, "सबसे पहले तो मैं रॉजर को वापसी के लिए शुभकामनाएं देना चाहूँगा। हम जानते हैं कि तंदरुस्त और स्वस्थ होने पर, वह कभी भी किसी को भी मात दे सकते हैं। उनके पास सेवेरिन (लुथी) और इवैन (जुबिकिच) समेत एक बेहतरीन कोचिंग टीम मौजूद है। हमारे चर्चे अन्य विषयों पर होती हैं, वह अधिकतर दो दोस्तों के बीच टेनिस को लेकर मतों के चर्चे जैसी होती है ना की हम एक दुसरे को सलाह या सुझाव देते हैं।"

वावरिंका नोवाक के साथ हुए फाइनल में पहला सेट हारे थे लेकिन उन्होंने कहा कि शुरुआती हार से उन्हें बिलकुल घबराहट नहीं हुई।

"एक बार जब आप कोर्ट में होते हो, तो सब कुछ अलग होता है। मैं मैच पर ध्यान लगाता हूँ। पहला सेट हारने पर बुरा लगता है लेकिन आगे बढ़ना ज़रूरी है। मैं वहां पर अपना खेल अच्छी तरह से खेल रहा था। तो मुझे घबराने की कोई ज़रुरत ही नहीं थी। बेस्ट ऑफ़ फाइव-सेट जैसे मैच में पहला सेट हारकर भी आप जीत अपने नाम कर सकते हैं। जैसा की आपने कहा यह मेरे साथ पहले भी रोनाल्ड गैरोस के फाइनल में हो चुका है। तो मेरा यह मानना है कि वह ज्यादा माएने नहीं रखता," वावरिंका ने कहा।

स्विस खिलाड़ी से यह भी पूछा गया था कि चार बार जीते हुए चेन्नई टूर्नामेंट की कामयाबी और ग्रैंड स्लैम की कामयाबी के बीच क्या कोई रिश्ता है? उन्होंने कहा, "पता नहीं कोई रिश्ता है या नहीं। लेकिन मैं जानता हूँ कि चेन्नई की उत्साहपूर्ण भीड़ के सामने खेलना मुझे हमेशा से ही अच्छा लगता है। प्रशंसक बहुत अच्छे हैं।"

हालांकि चेन्नई ओपन के अगले संस्करण में भाग लेने की बात पर उन्होंने मोहर नहीं लगाया। "मैं अगले साल के लिए अपने कार्य तालिका पर काम कर रहा हूँ। कुछ भी अभी तय नहीं है। पिछले कुछ हफ़्तों से मैं काफी व्यस्त रहा हूँ," उन्होंने कहा।

लगातार जीत के बदौलत वावरिंका, टेनिस जगत में काफी ऊँचे पायेदान पर पहुँच चुके हैं और इसके पीछे एक बड़ी वजह उनका मानसिक बल है जिसे पिछले कुछ वर्षों में उनके कोच मैगनस ने तैयार करने में उनकी मदद की है।

"कोचिंग बहुत कठिन होता है, यह एक पहेली की तरह है। इसे सफल बनाने के लिए आपको कई चीज़ों को साथ लाना होता है। मैगनस के साथ बात वही थी। उन्होंने इससे पहले रोबिन सोडरलिंग के साथ बेहतरीन काम किया है, और वो खुद भी एक बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं और ऐसे में उन्हें खेल के बारे बहुत अच्छे से पता है। मैं खेल को लेकर उनकी दृष्टिकोण को पसंद करता हूँ, जिस तरह से वो मुझसे बात करते हैं। इसमें काफी अहमियत कालमापन, सही समय पर सही कार्य करने और जब कुछ काम ना आये तो अपनी खेल नीति को बदलने के समय को समझना शामिल है। मैं कभी कभी जिद्दी होता हूँ और मैगनस को पता होता है कि मुझसे कैसे बात की जाए और बेहतर प्रदर्शन करवाया जाए और मुझे निरंतर सुधारा जाए," वावरिंका ने कहा।

तीन ग्रैंड स्लैम हासिल करने के बाद, स्विस चाहते हैं कि उनका कार्यकाल विंबलडन पर जीत के साथ समाप्त हो। विंबलडन एक ऐसा ग्रैंड स्लैम है, जिसमें उन्हें क्वार्टर्स से आगे बढ़ने में समस्या हुई है।

"यकीनन, इस बार मामला अलग होगा क्योंकि अब मैं तीन ग्रैंड स्लैम जीत चुका हूँ। मैं ग्रास पर बेहतर खेलने की कोशिश कर रहा हूँ। इस साल बात कुछ बनी नहीं लेकिन मैं और मेहनत करता रहूँगा और बेहतर करने के लिए सभी संभव विकल्पों पर काम करूँगा ताकि मैं क्वार्टरफाइनल के आगे जा सकूं। मुझे ग्रास पर खेलने के अनुकूल होने में समय लगता है, ग्रास पर खेलना थोड़ा आलग है।

"मेरे खेल के लिए वह ज्यादा तीव्र और मुश्किल है। देखते हैं आगे क्या होता है," उन्होंने कहा।

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