सानिया मिर्ज़ा और बारबोरा स्ट्राइकोवा हुए अलग

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सानिया मिर्ज़ा और बारबोरा स्ट्राइकोवा हुए अलग

सानिया मिर्ज़ा और बारबोरा स्ट्राइकोवा ने आने वाले समय में अपनी अपनी प्राथमिकताओं पर ध्यान देने के लिए, आपस में अलग होने का निर्णय लिया है। जहां सानिया अब यारोसलावा श्वेडोवा के साथ अपनी जोड़ी बनायेंगी वहीं स्ट्राइकोवा अपने एकल खेल पर ध्यान देना चाहती हैं।

मिर्ज़ा की नई 29 वर्षीय साथी श्वेडोवा कज़ाखस्तान से हैं और दाएं हाथ से खेलने वाली खिलाड़ी व्यक्तिगत युगल रैंकिंग में 13वे स्थान पर हैं। उन्होंने 13 युगल खिताब अपने नाम किये हैं, जिनमें 2010 के WTA दौरे में विंबलडन के महिला युगल का खिताब और US ओपन का खिताब शामिल है। इसके अलावा उन्होंने एक सिंगल का खिताब भी हासिल किया है।

जहां स्ट्राइकोवा इस हफ्ते विश्राम करने वाली हैं, वहीं मिर्ज़ा चार्ल्सटन में होने वाले फैमिली सर्किल कप में चेक खिलाड़ी एंड्रिया ह्लावाकोवा के साथ अस्थायी रूप से जोड़ी बनायेंगी। वैसे तो यह जोड़ी दूसरी वरीयता प्राप्त है लेकिन क्वार्टर फाइनल मुकाबले में ये रैकल अटावो और जेलेना ओस्टापेंको से 2-6, 4-6 से हार गयी।

मिर्ज़ा अब हैदराबाद लौट चुकी हैं और क्ले कोर्ट के सत्र की शुरुआत से पहले वह कुछ हफ्ते विश्राम करेंगी। उनके पिता और कोच, इमरान मिर्ज़ा ने ESPN से बात करते हुए स्ट्राइकोवा से अलग होने की खबर की पुष्टि की है और कहा है, "हाँ, 2 खिताब, 2 सेमी और कुछ क्वार्टर फाइनल तक पहुँचने वाली इस जोड़ी ने 10 टूर्नामेंट खेले हैं। लेकिन बारबोरा अब एकल प्रारूप पर ध्यान देना चाहती हैं और दोनों की प्रारूपों पर खेलने में वह बहुत थकी हुई महसूस करती हैं, सानिया युगल प्रतियोगिता में और भी बड़े ख़िताब हासिल करना चाहती हैं। इसीलिए दोनों आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया।"

पिछले साल मार्टिना हिंगिस से अलग होने के बाद, मिर्ज़ा ने स्ट्राइकोवा के साथ अपनी जोड़ी बनाई। मार्टिना और सानिया की जोड़ी ने 41 मुकाबलों में अपर्जित रही और लगातार तीन ग्रैंड स्लैम अपने नाम किया। भारतीय-स्विस जोड़ी ने फ्रेंच ओपन और विंबलडन से जल्दी बाहर होने के बाद, अलग होने का निर्णय लिया था।

इसके साथ ही मिर्ज़ा को स्ट्राइकोवा के साथ कामयाबी मिली। इस जोड़ी के साथ आते ही अगस्त में इन्होने सिनसिनाटी का ख़िताब अपने नाम किया। इसके बाद US ओपन के क्वार्टरफाइनल में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। टोक्य में दोनों फिर से जीत हासिल की और सितम्बर में वुहान के मुकाबले में वे रनर्स-अप रही।

इस साल इस जोड़ी के नाम एक भी खिताब नहीं हुआ, हालांकि वे हर टूर्नामेंट के आखिरी चरण तक पहुँचती रही। पिछले हफ्ते मायामी ओपन के फाइनल में जोड़ी कनाडा की गब्रिएला डेब्रोस्की और चीन की यिफेन जू से हार गयी। 2017 की शुरुआत में हुए सिडनी ओपन में भी भारतीय-चेक जोड़ी फाइनल तक पहुंची थी, वहीं ऑस्ट्रलियन ओपन के क्वार्टरफाइनल मुकाबले में जापानी जोड़ी एरी होज़ुमी और मियु काटो से हार कर उन्हें बाहर होना पड़ा।

मिर्ज़ा और स्ट्राइकोवा दोहा और दुबई में भी सेमी फाइनल्स तक पहुंची थी। वहीं इंडियन वेल्स में उन्हें क्वार्टर फाइनल से बाहर होना पड़ा। इस साल मिर्ज़ा ने सिर्फ ब्रिसबेन में जीत हासिल की जिसमें उनकी जोड़ीदार अमेरिकी खिलाड़ी बिथेनी मैटेक सेंड्स थी। वैसे तो WTA व्यक्तिगत युगल रैंकिंग में मिर्ज़ा शीर्ष स्थान पर थी लेकिन एक भी खिताब न जीत पाने के कारण वह अब सातवे स्थान पर आ गयी हैं।

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