साक्षी मलिक - मैं अपनी पोलो कार चलाउंगी और अपने पिता को बीएमडब्लू तोहफे में दूंगी

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साक्षी मलिक - मैं अपनी पोलो कार चलाउंगी और अपने पिता को बीएमडब्लू तोहफे में दूंगी

ओलंपिक में कांस्य मेडल जीतने के बाद पहलवान साक्षी मलिक की जिंदगी बदल गई है उनके लिए तारीफों के पुल बांधे जा रहे हैं। राष्ट्र का सबसे बड़ा खेल पुरस्कार उन्हें दिया गया है और इन सबसे ऊपर साक्षी कहते हैं कि वह लोगों की तारीफ और सम्मान से काफी खुश हैं ।

खेल के सबसे बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाने के बाद साक्षी मलिक सभी भारतीयों के दिलों में बस गई हैं। उन्हें राष्ट्र का सबसे बड़ा खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न दिया गया है।

मुझे कभी नहीं लगा था कि अर्जुन अवॉर्ड जीतने से पहले मुझे खेल रत्न मिल जाएगा । मुझे हमेशा लगता था कि, पहले मैं अर्जुन पुरस्कार विजेता साक्षी मलिक के नाम से जानी जाउंगी। मैं यह सोचा करती थी कि आखिर वह दिन कब आएगा जब मुझे यह सम्मान मिलेगा। लेकिन उससे भी बड़ा सम्मान मिला है। मैं अपने आप को बहुत खुशकिस्मत मानती हूं।साक्षी ने यह बातें एक इंटरव्यू के दौरान कही

23 साल की हरियाणा की इस पहलवान ने ओलंपिक में 11 दिन की मशक्कत के बाद कांस्य पदक जीता । वह पहली महिला खिलाड़ी हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है ।वह कहती हैं कि लोगों से मिला प्यार और सम्मान उनके लिए बहुत बड़ी बात है और वह इस बात से भाव-विभोर हैं।

हजारों की संख्या में लोग मुझे एयरपोर्ट पर मिलने आए थे। जहां भी मैं गई लोगों ने मुझे बहुत प्यार और सम्मान दिया । मैंने इसकी बिल्कुल भी उम्मीद नहीं की थी । प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और दूसरे बड़े लोगों ने जिस तरीके से मेरा आवभगत किया है वह अतुलनीय है।

बचपन में लड़कों के साथ खेलने का मौका मिलने की वजह से साक्षी इतनी मजबूत खिलाड़ी बन पाई हैं, और इसके लिये वो अपने कोच इश्वर सिंह दहिया का धन्यवाद कर जीत का श्रेय उन्हें देती है। साक्षी ने इस बात पर जोर दिया कि खिलाड़ियों को आराम के साथ-साथ और ज्यादा ट्रेनिंग की जरूरत है । विदेशों मे जाकर खिलाड़ी जब अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेंगे और जितना ज्यादा अभ्यास कर पाएंगे, उतना ही अपने प्रतिद्वंदियों को और उनकी खेल योजनाओं के समझ पाएंगे।खिलाड़ी यह तय कर पाएंगे कि उनका स्तर क्या है और आने वाले दिनों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पहलवानों के साथ कैसी रणनीति के साथ खेलना चाहिये ताकि जीत मिल सके। हमें अंतर्राष्ट्रीय खेल के स्तर तक पहुंचना होगा। हमारे राष्ट्रीय खिलाड़ियों को भी खुद को और ज्यादा बेहतर बनाना होगा ताकि वहां वो अपने प्रतिद्वंदियों को कड़ी टक्कर दे सकें।

ओलंपिक्स में जाने के पहले हमने 2-3 ट्रेनिंग कैम्प विदेशों में जाकर हिस्सा लिया।वह हमारे लिए बहुत फायदेमंद साबित हुए । मैंने अपने आप को बहुत हद तक सुधारा और जो परिणाम है वह सबके सामने है । मैं उम्मीद करती हूं कि हम इसी तरह अपने खेल के साथ जुड़े रहेंगे और हमें इसी तरह से विदेशों में मौका मिलता रहेगा ताकि ओलंपिक, कॉमनवेल्थ गेम्स, और एशियन कप जैसे बड़े खेलों में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

इस ओलंपिक में भारत को कुश्ती से ज्यादा उम्मीद थी। योगेश्वर दत्त हालांकि एक कठीन मुकाबले में  के आगे नहीं बढ़ पाए । नरसिंह यादव भाग ही नहीं ले पाए क्योंकि डोप टेस्ट में वो आरोपी साबित हो गए।  विनेश को पदक के लिये कड़ी मेहनत के दौरान चोट लग गई थी ।

साक्षी यहां पर खेल भावना का परिचय देती हैं और उन खिलाड़ियों के लिये सम्मान व्यक्त करती हैं जो सालों से कुश्ती में अपान योगदान दे रहें हैं।

साक्षी कहती है, मैंने एक से ज्यादा मेडल अपने कुश्ती टीम से उम्मीद की थी । पर शायद किस्मत ने साथ नहीं दिया ।ग्रीक और रोम के बीच कुश्ती का मुकाबला चल रहा था उस वक्त मैंने विनेश से कहा था कि हमें मेडल जीतना है । हमें लगता था कि विनेश कम से कम एक रजत पदक तो ले ही आएंगी क्योंकि उन्होंने पहले दौर के मुकाबले में प्रदर्शन किया वो अद्भुत था। उन्होंने रोम के प्रतिद्वंदी को 11-0 से पीछे कर दिया था। बाद मे बदकिस्मती से उन्हें चोट लग गई। इसके बाद नरसिंह यादव पर बैन था। पहलवान जी(योगेश्वर दत्त) से हम उम्मीद कर रहे थे कि उन्हें पदक मिलेगा, पर वो भी आगे नहीं खेल पाए। कोई न कोई छाटी बड़ी बातें होती रहीं और हम पूरी तरह से उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए।

देश के लिए कांस्य पदक जीतने के बाद साक्षी मलिक को सचिन तेंदुलकर ने एक नई बीएमडब्लू कार  तोहफे में दी। साक्षी कहती है कि वह इस कार की चाबी अपने पिता को सौंपना चाहते हैं,जिन्होंने उनके लिए बहुत मेहनत की है, बहुत ही बातें सुनी है उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने के लिये।

2 साल पहले 2014 में ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान रजत पदक मिला था, मेरे पिता ने मुझे वीडब्लू पोलो कार तोहफे में दी थी। अब मैं उन्हें bmw तोहफे में दूंगी। उन्होंने मेरे लिए बहुत त्याग किया है।

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