ओलंपिक में मेडल चूक जाने पर किदांबी श्रीकांत ने खो दी थी रातों की नींद

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ओलंपिक में मेडल चूक जाने पर किदांबी श्रीकांत ने खो दी थी रातों की नींद

रियो ओलंपिक 2016 में किदांबी श्रीकांत पुरूष एकल में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अंतिम 16 में जगह बनाई थी। बहरहाल, क्वार्टर-फाइनल में उन्हें लिन डेन ने काफी करीबी मुकाबले में हराया था और श्रीकांत ने माना की इस हार ने उन्हें काफी ठेस पहुंचाई है।

पिछले साल आयोजित हुआ ओलंपिक किदांबी श्रीकांत के लिए काफी यादगार रहा। पहले उन्होंने लिनो मुनोज और हेनरी हर्सकाइनिन को हराया और उसके बाद उलटफेर करते हुए दुनिया के नंबर 5 खिलाड़ी जान ओ जोर्गेन्सन को 21-19, 21-19 से शिकस्त देकर क्वार्टर फाइनल में स्थान पक्का किया। लेकिन वहां दो बार के ओलंपिक चैंपियन चीन के खिलाड़ी से किदांबी को हार का सामना करना पड़ा। दुनिया के पूर्व नंबर 3 खिलाड़ी ने इस हार से मिली निराशा के बारे में टाइम्स आॅफ इंडिया को बताया कि इस नतीजे की वजह से उन्होंने कई रातें जागकर बिताई।

उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी खिलाड़ी के करियर में ओलंपिक एक महत्वपूर्ण स्टेज है। मुझे सच में लगता है कि मैंने दो अंकों से मेडल गंवा दिया। ये अब भी मुझे रातों में जगाए रखता है। रियो में हारने के बाद, मैं कई रात सो नहीं पाया। मैं लगातार उस क्वार्टर-फाइनल के बारे में सोचता रहा।’’

श्रीकांत ने कहा कि इस हार से वो इतने प्रभावित हुए कि एक खिलाड़ी के तौर पर उनमें काफी बदलाव आया।

‘‘लेकिन इससे एक खिलाड़ी के तौर पर मैं बदल गया। मैंने अपने करियर का सबसे अहम मुकाबला गंवा दिया, और मैं जानता हूं कि इससे बड़ा और कुछ नहीं हो सकता है। मैं कुछ देर के लिए सोचना बंद कर सकता हूं और जीत के बारे में ध्यान लगा सकता हूं क्योंकि मैं सिर्फ और सिर्फ बैडमिंटन के बारे में जानता हूं। ओलंपिक के बाद जो मैंने टूर्नामेंट खेला वो जापान ओपन था, जहां पहले राउंड में मैं कश्यप के खिलाफ और दूसरे राउंड में अजय के साथ खेला, इससे लगा जैसे मैं राष्ट्रीय टूर्नामेंट में खेल रहा हूं। मैं सिर्फ जाकर अच्छा खेलना चाहता था और रियो में जो कुछ भी हुआ उसे भूलना चाहता था।’’

इस खिलाड़ी को श्रेय जाना चाहिए जिन्होंने इस हार को भूलाकर ऐतिहासिक सिंगापुर ओपन के फाइनल में जगह बनाई, जहां उनकी भिडं़त साईं प्रणीत से हुई। ऐसा पहली बार हुआ जब दो भारतीय खिलाड़ी सुपरसीरीज इवेंट के फाइनल में पहुंचे। गौरतलब है कि साईं इस टूर्नामेंट के विजेता बने।

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