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ओलिंपियन मैरी कोम ने तय किया टोक्यो 2020 का लक्ष्य

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© Getty Images

ओलिंपियन मैरी कोम ने तय किया टोक्यो 2020 का लक्ष्य

मैरी कोम ने माना है कि वह 2020 के टोक्यो ओलिंपिक गेम्स में भाग लेने की उम्मीद कर रही हैं, लेकिन उनका मुख्य ध्यान 2018 के एशियन और कॉमनवेल्थ गेम्स पर होगा। लंदन ओलंपिक्स की पदक विजेता ने कहा है कि वह अपने मुक्केबाजी के कार्यकाल को और तीन चार साल तक बढ़ाने के लिए काफी महनत कर रही हैं।

मैं IG स्टेडियम में होने वाले राष्ट्रीय शिविर में शामिल हो रही हूँ। मैं अगले तीन-चार साल तक खेलना चाहती हूँ। अगर 2020 ओलिंपिक गेम्स में 48 किलो की श्रेणी शामिल होती है, तो मैं इसमें हिस्सा लेने और अपने देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना का प्रयास करुँगी," मैरी कोम ने PTI से कहा।  

"मैंने प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया है, हालांकि, संसद सत्रों के कारण, राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाजी की प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पायी हूँ लेकिन मैं अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूँ। 2018 एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स मेरे मुख्य उद्देश्य हैं और मैं अन्य अधिकारिक अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लेना चाहूंगी।"  

33 वर्षीय खिलाड़ी की मुक्केबाजी प्रशिक्षण केंद्र, मैरी कोम रीजनल बॉक्सिंग फाउंडेशन (MKRBF) ने सोमवार को पेट्रोलियम स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड (PSPB) के साथ अपनी सांझेदारी शुरू की है। PSPB के साथ हुए समझौते से यह सुनिश्चित किया जायेगा कि एथलीटों को सभी सुविधाएँ मिले। इसी के साथ, अकादमी खिलाड़ियों को पांच साल में रु. 75 लाख की राशि भी दी जाएगी।

"महिला मुक्केबाजी मशहूर होती जा रही है। मैं अपने खेल और अपने देश को योगदान देना चाहती हूँ। मैं अपने प्रशिक्षण केंद्र से भारत के लिए और भी विजेतएं उत्पन्न करना चाहती हूँ, यही मेरा सपना है। वंचित युवाओं के प्रशिक्षण के लिए अकादमी में जिम और आउटडोर रिंग्स भी बनाये गए हैं," कोम ने कहा।

कोम ने स्पष्ट किया कि क्यों वह अपनी संसदीय जिम्मेदारियों और अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज़ के दिनचर्या के बीच जूझ रही थी।

"लोगों को यह लगता होगा कि मैं MP के तौर पर समय दे पाऊँगी या नहीं, लेकिन यह भी मेरा एक सपना था। ज़्यादातर मुक्केबाज़ गरीबी से निकलकर आते हैं, इसीलिए अगर पदक जीतने के साथ, मैं उन खिलाड़ियों के लिए कुछ कर सकूं तो यह मेरी बड़ी उपलब्धि होगी।

सपोर्ट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (SAI) ने भी उनकी अकादमी के लिए सहायता का प्रस्ताव रखा है।

"SAI हमें अपने एक्सटेंशन स्कीम के अंतर्गत सहायता प्रदान कर रहा है जिससे हर प्रशिक्षणार्थी मुक्केबाज़ को महीने के रु. 600 और एक किट मुहैय्या कराया जाता है हमें NDSF (नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट फण्ड) से भी सहायता मिल रही है SBI ने हॉस्टल बनवाने के लिए रु. 2 करोड़ दिए हैं," पांच बार विश्व विजेता बन चुकी खिलाड़ी ने कहा

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