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तीसरे टेस्ट से पहले, विराट कोहली ने सबको DRS मामला भूलने को कहा

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तीसरे टेस्ट से पहले, विराट कोहली ने सबको DRS मामला भूलने को कहा

विराट कोहली ने उन सभी को DRS मामले भूलकर आगे बढ़ने को कहा जिनपर खेल निर्भर है। चार मैचों की इस सीरीज में 1-1 की बराबरी पर रहने वाली अव्वल रैंकिंग वाली भारतीय टीम और ऑस्ट्रेलिया, गुरुवार को, रांची में एक अहम मुकाबले के लिए भिड़ेंगे।

"DRS विवाद को लेकर पहले ही बहुत बातें हो चुकी है, अब सीरीज पर ध्यान देने का वक़्त है। जो बैंगलोर में हुआ वह पुरानी बात है। दोनों टीम उस विवाद से आगे बढ़ चुकी हैं, यह समय है जब सब इस बात को भूल जाए, और क्रिकेटर के तौर पर हमें अपने काम पर ध्यान देना होगा," कोहली ने JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में हुए प्रेस कांफ्रेंस में कहा।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें दूसरे टेस्ट में DRS मामले के बाद अपने द्वारा की गयी टिप्पणियों को लेकर अफ़सोस है, तो उन्होंने कहा, "मैंने जो कहा उसे लेकर मुझे अफ़सोस नहीं है, लेकिन, जैसा की मैंने कहा अब हमें उससे आगे बढ़ना होगा। हम उसी के बारे में सोचते नहीं रह सकते। हम इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहते क्योंकि पहले ही हम देख चुके हैं कि किसी चीज़ को ज़रुरत से ज्यादा खींचने का नतीजा बुरा ही होता है। यह सबके हित में होगा अगर हम मैच पर ध्यान दें।"

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया द्वारा की जाने वाली आलोचनाओं के मामले में भी कोहली ने शान्ति बनाये रखा और कहा, "ठीक है अगर वे मेरी आलोचना करते हैं, मैं इसे स्वीकार करता हूँ। वे अपना काम कर रहे हैं, और मैं अपना।"

खिलाड़ी बनाम खिलाड़ी (मसलन ल्योन बनाम अश्विन, कोहली बनाम स्टीव स्मिथ) के बारे में बात करते हुए कोहली ने कहा कि उनकी टीम इन सारी बातों पर ध्यान नहीं देती। "हम विरोधियों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, अश्विन के छः विकेटों की पारी, नेथन के आठ विकेट का जवाब नहीं थी। हम ऐसे प्रतियोगिताओं पर ध्यान नहीं देते, यह तो सिर्फ खेल में दिलचस्पी बढ़ाने के लिए लाया जाता है, जो सही भी है।"

शृंखला में पिचों पर हो रही बहस को लेकर कोहली ने कहा, "अगर पिच सपाट भी हो, तो भी आप टीम को जीताने के लिए मेहनत करते हैं। मेरे ख्याल से बल्लेबाजी के असफल होने के पीछे वजह मानसिक तनाव है।"

आखिर में कोहली ने इस मुकाबले के लिए खिलाड़ियों द्वारा खेल की शैली में लाये गए बदलाव के बारे में बात की, खासकर नेथन ल्योन के खिलाफ चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की, जिसे बेंगलुरु टेस्ट भारत को जीत दिलाने का श्रेय जाता है।

"व्यक्तिगत तौर पर खिलाड़ियों ने अपनी तकनीकों में बदलाव किया। मैंने पुजारा को ल्योन की गेंद को सटीक ढंग से सँभालते हुए देखा। अजिंक्य का गेंद की लाइन पर खेलना भी एक परिवर्तन था। इस तरह हमें काफी फायेदा मिला और नतीजे काफी अलग हो गए," उन्होंने कहा।

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