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देखें: ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सीरीज में भारत ने आख़िरकार की सही समीक्षा की मांग

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देखें: ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध सीरीज में भारत ने आख़िरकार की सही समीक्षा की मांग

आख़िरकार, आज विराट कोहली अपने DRS के फैसले को लेकर सही साबित हो ही गए। रविचंद्रन अश्विन की गेंद शौन मार्श के बल्ले के किनारे से लगी और शोर्ट लेग पर खड़े चेतेश्वर पुजारा के हाथों में पहुंची। इसपर एक सही समीक्षा की मांग करके, भारत कुछ हद तक सभी आलोचनाओं पर रोक लगाने में कामयाब हुआ है।

BCCI शुरुआत में DRS के इस्तेमाल के सख्त खिलाफ था क्योंकि 2008 में श्री लंका के खिलाफ हुई शृंखला इस्तेमाल हुए हॉक ऑय टेक्नोलॉजी में काफी कमियां देखी गयी थी। इस तकनीक में कई सारे बदलाव लाये जाने के बाद, इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज में BCCI ने इसके इस्तेमाल की अनुमति दी। लेकिन, इंग्लैंड के खिलाफ राजकोट में हुए पहले टेस्ट के बाद, इस प्रणाली के साथ भारत का अनुभव कुछ ख़ास नहीं रहा है। इसके पीछे वजह भारतीय खिलाड़ियों द्वारा मांगी गयी बेवजह की समीक्षाएं हैं।

पिछले सात टेस्ट में, कोहली द्वारा ली गयी 63% समीक्षाएं बिलकुल बेवजह थी। 31 में 19 LBW के रिव्यु असफल रहे। लेकिन, धोनी के शहर में, कोहली टीम के पूर्व कप्तान की तरह, सही निर्णय लेने में कामयाब रहे, और DRS के इस्तेमाल से शौन मार्श को पवेलियन भेजा।

मैच के 25वे ओवर में, अश्विन की गेंद मार्श के पैड से लगकर बल्ले के किनारे पर लगी, और सीधे शोर्ट लेग पर खड़े चेतेश्वर पुजारा के पास पहुंची, जिसे उन्होंने सफलता के साथ पकड़ लिया। लेकिन मैदान में मौजूद अंपायर यह समझ नहीं पाए और फैसला बल्लेबाज़ के पक्ष में सुनाया। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रिव्यु की मांग की।

तीसरे अंपायर, नायजेल लॉन्ग ने रीप्ले की जांच की और अल्ट्रा एज के ज़रिये बल्ले के किनारे से गेंद के लगने का सबूत पाया और मैदान में मौजूद अंपायर से कहा, "इयन, मुझे पूरा विश्वास है कि गेंद बल्ले के किनारे को छूकर गयी है।"   

महज़ दो रन बनाकर मार्श को पवेलियन लौटना पड़ा और इस तरह से DRS को लेकर भारत की असफलता पर भी अंकुश लगा।

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