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एआईएफएफ कमेटी के अध्यक्ष भाईचुंग भूटिया ने कहा आईएसएल में निर्वासन आवश्यक

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एआईएफएफ कमेटी के अध्यक्ष भाईचुंग भूटिया ने कहा आईएसएल में निर्वासन आवश्यक

भारतीय फुटबॉल के दिग्गज भाईचुंग भूटिया ने गुरुवार को कहा कि वो एआईएफएफ ने नए प्रस्ताव से बिलकुल असहमत हैं जिसमे आई-लीग की टीम को आईएसएल में पदोन्नत कर स्थान देने के बारे नहीं कहा गया है। भूटिया ने अंडर-17 विश्व कप का 2017 भारत में आयोजन करने की प्रशंसा की है।

भाईचुंग भूटिया, जो कि भारतीय फुटबॉल के जाने माने दिग्गज और अखिल भारतीय फुटबॉल संघ की तकनीकी कमेटी के अध्यक्ष भी हैं, ने गुरुवार को बताया कि उन्हें लगता है कि अगर लीग-1 (आई-लीग का नया संस्करण) और आईएसएल में निर्वासन और पदोन्नति हो यह भारतीय फुटबॉल के लिए अच्छा रहेगा। आईएसएल और लीग-1 (आई-लीग का नया संस्करण) एआईएफएफ के क्लब फुटबॉल संरचना में सबसे ऊपर हैं जिसमे निर्वासन और पदोन्नति का कोई नियम नहीं है। बहुत से आई-लीग क्लब मानते हैं कि ऐसा होने से उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक फुटबॉल खेलने को मिलेगा।

हार्वेस्ट इंटरनेशनल स्कूल के एक समारोह में इस 39 वर्षीय खिलाडी ने कहा,“ कहीं न कहीं निर्वासन और पदोन्नति होनी चाहिए। हम शायद कुछ सालों में में आई-लीग से आईएसएल में पदोन्नति कर पाएंगे। आशा है कि इस से आई-लीग के खिलाडियों को प्रेरणा और टीमों को प्रायोजक मिलेंगे।”

लेकिन भूटिया को लगता है कि नयी लीग संरचना अताराष्ट्रीय मैचो को भी समायोजित करने में सहायता करेगी जिस से राष्ट्रीय टीम को भी लाभ होगा।

उहोए थे हिन्दू को बताया,“ राष्ट्रीय टीम के लिए योजना बनाने के लिए काफी समय होगा। फिलहाल हमारी राष्ट्रीय टीम के बहुत से मैच नहीं खेल पा रही है। यह संरचना हमें अनाताराष्ट्रीय दोस्ताना मैच और क्वालीफ़ायर फीफा द्वारा पूर्वनियोजित तिथियों पर खेल पाएंगे जिस से हमारी रैंकिंग पर भी प्रभाव पड़ेगा।”

उन्होंने जोर दिया,” हम फुटबॉल खिलाडियों के लिए रोजगार के मौके खो रहे हैं। एक खिलाडी जो आइएसएल में खेलता है, फिर वो आई-लीग में चले जाते हैं और कुछ दूसरे डिवीज़न में चले जाते हैं। तो जो खिलाडी आईएसएल नहीं खेलते उहे आई-लीग में भी खेलना का मौका नहीं मिलता।”

भूटिया फीफा अंडर-१७ विश्व कप कि मेजबानी करने के महत्व पर कहा ये फुटबॉल को जड़ से विकसित करने में सहायता करेगा।

“यह खेल को जड़ से विकसित करने में बहुत सहायता करता है।आयु-वर्ग प्रतियोगिताओं जैसे कि अंडर-15 में टीमों की संख्या 10 से बढ़कर लगभग 50 पहुच गयी है। ये बहुत बड़ा है!”

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