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कबड्डी विश्व कप 2016 | समीक्षा : भारत खिताब पर पकड़ बरक़रार रखने के लिए तैयार

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कबड्डी विश्व कप 2016 | समीक्षा : भारत खिताब पर पकड़ बरक़रार रखने के लिए तैयार

जहाँ अधिकतर भारतीय खेल प्रशंसक टेस्ट में क्रिकेट टीम के न.1 पर पहुंचने की ख़ुशी मना रहे हैं वहीं दूसरी तरह भारत खेल जगत में अपने उस खिताब को बचाने की कोशिश करेगा जिसपर उसकी पकड़ शुरुआत से रही है। 7 अक्टूबर से होने वाले 2016 कबड्डी वर्ल्ड कप में भारत लगातार तीसरी बार विश्व विजेता बनने की कोशिश करेगा।

प्रो कबड्डी लीग की सफलता के साथ, खेल अपने लिए प्रशंसकों की भीड़ इकठ्ठा करने में कामयाब हुई है लेकिन अब भी वह ऊंचे स्तर तक नहीं पहुँच पायी है। कल से विश्व कप का आगाज़ हो रहा है, और पेश है इस टूर्नामेंट के कार्यक्रम और इसके लिए भारत की तैयारियों पर एक विवरण।

प्रतिद्वंदी टीम

कबड्डी वर्ल्ड कप (मंडलीय प्रारूप नहीं) का तीसरा संस्करण नौ साल के बाद वापसी कर रहा है और कुछ भारतीय खिलाड़ी ऐसे हैं जो अब भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं। टूर्नामेंट 12 टीमों के बीच खेली जाएगी इन्हें दो समूहों में बांटा गया है। प्रत्येक समूह में से दो खिलाडी सेमी-फाइनल में खेलेंगे।

पहले चरण में भारत का मुकाबला दक्षिण कोरिया, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और बांग्लादेश से होगा। जबकि दूसरी तरफ, भारत की जीत के रास्ते पर सबसे बड़ा खतरा, ईरान की भिड़ंत उसके राजनैतिक दुश्मन USA, केन्या, जापान, थाईलैंड और पोलैंड से होगी। पिछले दो फाइनलों में हार का सामना करने वाली ईरान की टीम इस बार, कबड्डी की उत्पन्न भूमि में हो रहे इस मुकाबले में, अपना बदला लेने की पूरी कोशिश करेंगी।

पूल A

पूल B

भारत

ईरान

दक्षिण कोरिया

यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका

इंग्लैंड

केन्या

ऑस्ट्रेलिया

जापान

अर्जेंटीना

थाईलैंड

बांग्लादेश

पोलैंड

भारत का पहला मुकाबला दक्षिण कोरिया से होगा, जो इस समूह के सबसे खतरनाक प्रतिद्वंदी हैं, जिसमें सेयोंग रायोल किम और जेंग कुन ली जैसे दमदार खिलाड़ी हैं। यह मुकाबला 7 तारिख को टूर्नामेंट के उद्घाटन खेल के तौर पर होगा। अगले ही दिन भारत ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगी, जिसके बाद दो दिन के छोटे से अंतराल के बाद, टीम का मुकाबला बांग्लादेश से होगा।  

18 को इंग्लैंड के विरुद्ध खेलने से पहले, 15 अक्टूबर को भारत अर्जेंटीना से भिड़ेगा। 

अगर पिछले खेलों में विजेता रहे भारत इस बार भी कामयाब रहा तो वह दूसरे ग्रुप के दूसरे स्थान की टीम से भिड़ेगा, जो शायद जापान अथवा थाईलैंड हो सकता है।

22 अक्टूबर को इस टूर्नामेंट का फाइनल मैच होगा।

भारतीय महत्वपूर्ण खिलाडी

1. अनूप कुमार

कबड्डी टीम के कप्तान अब 32 साल के हैं और भारत के बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक हैं। तनावपूर्ण माहौल में शांत रहना उनकी विशेषता है जिससे उन्हें कबड्डी टीम के कैप्टेन कूल का खिताब मिला है। PKL में, वह यू मुम्बा की टीम की कप्तानी करने हैं, और उनके नेतृत्व में टीम ने टूर्नामेंट के दूसरा संस्करण पर जीत हासिल की थी। PKL के पहले सीजन के MVP एक राईट रेडर हैं और एशियन गेम्स में जीते गए दो स्वर्ण पदक उन्हें टीम का एक भरोसेमंद खिलाड़ी बनाता है। 

2. मंजीत छिलर

पूर्व पहलवान को टूर्नामेंट में उप-कप्तानी सौंपी गयी है और बेंगलुरु बुल्स तथा पुणेरी पलटन की कप्तानी संभालने वाले इस खिलाड़ी को टीम की इस ज़िम्मेदारी से कोई दिक्कत होनी नहीं चाहिए। मैदान में, 30 वर्षीय खिलाड़ी हरफनमौला है जिनका आक्रामक और बचाव क्षेत्र काफी मज़बूत है।

3. राहुल चौधरी

जब आप PKL के पिछले संस्करण में रेड के ज़रिये 146 अंक और केवल 57 खेलों में कुल 500 अंक हासिल करते हैं, तो भारतीय टीम में भी सबकी नज़र आप पर ही होगी। भारतीय कबड्डी के प्रमुख चेहरे को काफी ख्याति मिल चुकी है लेकिन उन्होंने इसका प्रभाव कभी अपने खेल पर पड़ने नहीं दिया। अगर मैं बोली लगती, तो इस विश्व कप में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाले खिलाड़ी के तौर पर मेरा चुनाव राहुल चौधरी होते।  

4. संदीप नरवाल

संदीप नरवाल भारत के फौलाद हैं जिन्हें यह नाम उनके मज़बूत फुल बॉडी टैकल्स के ज़रिये मिला है जिसकी मदद से PKL में उन्होंने अपनी टीम के लिए 161 टैकल अंक इकठ्ठा किये थे। 22 वर्षीया यह खिलाड़ी को लीग में महज़ 62 खेलों में 171 रेड अंक हासिल करने के कारण एक डिफेंसिव आल-राउंडर हैं बनाया गया है। तीसरे संस्करण में पटना को PKL का ख़िताब दिलाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई थी और उन्हें बेस्ट डिफेंडर का पुरस्कार भी मिला था।   

प्रतिद्वंदी जिनसे है खतरा

दक्षिण कोरिया

जेंग कुन ली और सियोंग रायोल किम जैसे खिलाड़ियों के साथ दक्षिण कोरिया की टीम ग्रुप स्टेज में भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

प्रो कबड्डी लीग में हिस्सा ले चुके दक्षिण कोरिया के इन दो खिलाड़ियों का अपनी टीम में काफी अधिक प्रभाव था जिसमें से किम ने महज़ 52 मैच में 262 अंक हासिल किये थे। भारतीय खिलाड़ियों के साथ और उनके विरुद्ध खेलने का अनुभव होने के कारण, उन्हें अपने विरोधियों की कमज़ोर और मज़बूत कड़ियों का पता होगा।

ईरान

जब बात बड़े चरणों की हो तो, कबड्डी में इरान भारत का सबसे बड़ा दुश्मन रहा है, जिनसे भारत दो बार फाइनल में भीड़कर जीत हासिल कर चुका है।

हालांकि इस वक़्त मुकाबला भारतीय ज़मीन पर एक ऐसी टीम के साथ है जिसमें अनुभवी तथा युवा खिलाड़ियों का मिश्रण है और जो प्रो कबड्डी लीग में अपने भारतीय प्रतिद्वंदियों के साथ खेल चुके हैं।   

फैज़ल अत्रचालि, मिराज शेख, हादी ओशतोराक और अबुलफ़ज़ल माघसोदलू भारत के लगातार तीसरी बार जीतने के रास्ते पर अहम रूकावट हैं जिनमें से फ़ज़ल ने डिफेंसिव पोजीशन पर 32 मैचों में 95 अंक हासिल किये हैं।

वहीं मिराज 161 अंक और अबुलफज़ल ने 12 मैचों में 25 अंक हासिल कर एक अच्छा प्रदर्शन देते आएं हैं।  

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