user tracker image

कबड्डी विश्व कप के नियमों की हुई घोषणा, पूर्णतः राष्ट्र-विरोधी

no photo
camera iconcamera icon|

कबड्डी विश्व कप के नियमों की हुई घोषणा, पूर्णतः राष्ट्र-विरोधी

कबड्डी विश्व कप का आठवां संस्करण इस बार अक्टूबर में अहमदाबाद में आयोजित होने वाला है तथा भारत जो पहले ही सात संस्करणों का विजेता रहा है इस बार भी वैसा ही कमाल कर दिखाएगा। लेकिन इस बार यदि भारत जीतता है तो भी नियमों के मुताबिक 8/10 गोल्ड मेडल ही भारत के खाते में आ पाएंगे।

साल 2016 यकीनी ही ‘अप्रवासियों का वर्श’ रहा जब रियो ओलंपिक में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक संघ द्वारा अत्यंत कष्टदायी घटनाओं को झेलने वाले अप्रवासियों के लिए ‘ओलंपिक शरणार्थी टीम’ बनाई गई। बहरहाल, ‘अतिथि देवो भवः’ के इस देश ने अपना ओलंपिक रिकॉर्ड थोड़ा सुधारा। आगामी अक्टूबर महीने में भारत गुजरात के अहमदाबाद में कबड्डी विश्व कप की मेजबानी करेगा। जहां ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, कनाडा, इंग्लैंड, भारत, ईरान, जापान, केन्या, दक्षिण कोरिया, पाकिस्तान, पोलैंड तथा अमेरिका की टीमें हिस्सा लेंगी। गौरतलब है कि विश्व कप के लिए टीम की घोशणा करने से पहले राष्ट्रों को गहरे विचार-विमर्श करने पड़ रहे हैं।

प्रतियोगिता के नियम वेबसाइट पर डाले गए तथा ‘मैच रूल्स’ के नियम संख्या 1 के अनुसार

‘‘भाग लेने वाली प्रत्येक टीम में न्यूनतम 10 और अधिकतम 12 खिलाड़ी होंगे। 7 खिलाड़ी एक समय पर मैदान में उतरेंगे और शेश 5 स्थानापन्न खिलाड़ी की भूमिका में होंगे।

‘‘केवल क्षेत्ररक्षण के दौरान ही दल के 10 खिलाड़ियों में से एक विदेशी खिलाड़ी को स्थान दिया जाएगा।’’

अमेरिका जो कि अप्रवासी बहुल देश है उसके लिए दो अप्रवासी खिलाड़ियों का चयन काफी आसान कार्य है। पाकिस्तान भी अपने दो अप्रवासी कबड्डी खिलाड़ी सरलतापूर्वक भारतीय अप्रवासियों में से चुन सकता है। लेकिन बांग्लादेश के संदर्भ में तो यह हास्यास्पद है कि उन्हें अप्रवासी खिलाड़ियों के चुनाव के लिए कहा गया है।

पर विश्व कप के लिए राश्ट्रों के बीच ऐसे मजेदार नियम की क्या आवश्यकता है? इसका जवाब बहुत ही सरल है, कि यह नियम इतना मजाकिया नहीं है। कबड्डी आयोग के कुछ ज्यादा ही कर्मठ कर्मचारियों ने प्रो-कबड्डी लीग (जो हर 6 महीने में हम स्टार स्पोर्ट्स पर देखते हैं) के नियमों को हुबहू कॉपी करने का एक मेहनती कार्य किया।

प्रो-कबड्डी लीग का नियम संख्या 1 यह कहता है कि

‘‘क. टीम

प्रत्येक टीम न्यूनतम 10 और अधिकतम 12 खिलाड़ी रखेगी। 7 खिलाड़ी एक समय पर मैदान में उतरेंगे और वहीं बाकि 5 खिलाड़ी स्थानापन्न के रूप में रहेंगे। हर टीम को दो अप्रवासी खिलाड़ी अपने दल में रखने की जरूरत होगी।

अ. केवल क्षेत्ररक्षण के समय पर ही अप्रवासी खिलाड़ी दल का हिस्सा होंगे और मैदान में उतरेंगे।’’

इतनी समानता!! वाह!!

इन सब के बाद भी हमारे प्रिय नेतागण 7 अक्टूबर को अहमदाबाद में उद्घाटन समारोह में शिरकत करेंगे और इस नियम के तारीफ में कहेंगे कि ‘‘हम भारतीय खेल कबड्डी को एक अंतर्राष्ट्रीय खेल बनाने जा रहे हैं।’’ पर भारत साहित्यिक (नियमों) की चोरी का अपना पसंदीदा खेल खेलना कब बंद करेगा।

Follow us on Facebook here

Stay connected with us on Twitter here

Like and share our Instagram page here

SHOW COMMENTS drop down