22 वर्षीय विनीता ने पैर के दर्द के बाद भी ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को हरा स्वर्ण पदक जीता

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22 वर्षीय विनीता ने पैर के दर्द के बाद भी ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट को हरा स्वर्ण पदक जीता

विनीता भारद्वाज ने कई मुश्किलों से उभरते हुए वर्ल्ड यूनीवर्सिटी चैंपियनशिप के वीमेंस 10 मीटर एयर राइफल में स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने वर्ल्ड नंबर-1 शूटर यी सिलिंग को हराया, जबकि उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने और पैर के दर्द को कम करने के लिए इंजेक्शन भी लेना पड़ा।

विनीता भारद्वाज डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में साइकोलॉजी फाइनल इयर की छात्रा हैं। पिछले आठ सालों में उनके दाहिने पैर का चार बार ऑपरेशन हो चुका है। पोलैंड के  ठंड भरे मौसम में उन्हें खड़ा रह पाने के लिए भी इंजेक्शन का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद भी इस 22 वर्षीय युवा शूटर ने हार नहीं मानी और 206.0 अंक लाकर विश्व की नंबर एक शूटर यि सिलिंग को हराकर गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहीं। सिलिंग ने 2012 लंदन ओलिंपिक में गोल्ड मेडल और रियो ओलिंपिक में ब्रांज मेडल जीता था। उन्होंने यहां 205.6 अंक जुटा कर कांस्य पदक जीता।

विनीता ने मैच के बाद कहा, ‘मेडल ने मेरा दर्द खत्म कर दिया है। मैं पोडियम पर गर्व के साथ खड़ी थी।’

विनीता को इंडियन आर्मी के मिशन ओलिंपिक प्रोग्राम में उनके पैर की हालत के कारण नहीं चुना गया था। हालांकि, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं भाग लेना नहीं छोड़ा। 

 विनीता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भाग लेने और जर्मनी में 2011 के जूनियर वर्ल्ड कप में भाग लेने से मेरा विश्वास बढ़ा है। मैंने अब अलग-अलग मौसम में सामंजस्य बिठाना भी सीख लिया है।

विनीता ने 10 मीटर एयर राइफल टीम इवेंट में भी सिमरत चहल और दिलरीन गिल के साथ स्वर्ण पदक जीता। भारत को पोलैंड में कुल पांच गोल्ड, दो सिल्वर और तीन ब्रांज मेडल जीते।  

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