सुनहरे ट्रिगरवाली निशानेबाज - अपूर्वी चंदेला

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सुनहरे ट्रिगरवाली निशानेबाज - अपूर्वी चंदेला

बीजिंग के बर्ड नेस्ट स्टेडियम में ‘जन गण मन’ की ध्वनि गूंज रही थी। भारतीय ध्वज लहरा रहा था। अभिनव बिंद्रा गले में सुसज्जि गोल्ड मेडल के साथ खड़े थे। इस लम्हे ने देश के कई उभरते निशानेबाजों को प्रेरित किया जिसमें जयपुर की युवा खिलाड़ी अपूर्वी चंदेला भी शामिल थी। भारतीय खेल के सुनहरे पन्नों पर जब ये इतिहास लिखा जा रहा था तब अपूर्वी चंदेला टीवी के सामने बैठ कर अपने लिए नए रास्ते तैयार कर रही थी।

जयपुर के चंदेला परिवार से ताल्लुक रखने वाली ये लड़की चेल्सी के लिए दिदिएर द्रोग्बा के गोल और भारतीय क्रिकेट टीम की दीवानी रही। शूटिंग के साथ उनकी ये मोहब्बत अचानक और उम्मीद से परे थी। उन्होंने एक खेल पत्रकार बनने का भी रास्ता चुना, आमतौर पर कई खेल प्रेमी इसे अपनाते हैं।

मगर कुछ घंटों में ही सब कुछ बदल गया। 11 अगस्त 2008 को भारतीय ओलंपिक इतिहास में कुछ ऐसा हुआ जिसने अपूर्वी के करियर को खेल पत्रकार से राइफल शूटर में तब्दील कर दिया।

अपूर्वी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा कि ‘‘ये सब अनिश्चित था। मुझे खेल देखना बहुत पसंद है। पर मैंने किसी भी खेल को गंभीरता से नहीं लिया था, मुझे स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट बनना एक बेहतर विकल्प लगा। लेकिन बिंद्रा को स्वर्ण पदक जीतते देख लगा कि क्यों ना इसमें हाथ आजमाया जाए?’’

बेटी की इच्छा देखकर उनके पिता उन्हें जयपुर के शूटिंग रेंज में ले गए जहां अपूर्वी ने अपने हुनर का जलवा दिखाते हुए पहले शाॅट में ही परफेक्ट 10 का स्कोर हासिल कर लिया। उसके बाद तो सब इतिहास है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महिला 10मीटर एयर राइफल स्पर्धाओं में भारत की विरासत को अंजली भार्गव और सुमा शिरूर जैसी बेहतरीन खिलाड़ियों ने आगे बढ़ाया है। इन महान निशानेबाजों के पदचिन्हों पर बढ़ते हुए अपूर्वी भी इस 10 मीटर की रेंज में अपनी मंजिल को पहचान चुकी है।

प्रारंभिक चार सालों में अपूर्वी शूटिंग के साथ अपनी नजदीकियों को बढ़ा रही थी, उसी दौरान साल 2012 में उन्होंने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया। जयपुर की इस 19 साल की युवा खिलाड़ी ने पहली बार सीनियर सर्किट में खेलते हुए महाराष्ट्र  की पूजा घाटकर को गोल्ड मेडल के लिए 0.2 अंकों से पीछे छोड़ दिया।

जल्द ही वो इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स के लिए भारतीय दल का हिस्सा बन गई। गौरतलब है कि अपूर्वी को 2014 तक इंटरनेश्नल लेवल पर पदक पाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ी। मार्च 2014 में नीदरलैंड में आयोजित 35वें इंटरशूट प्रतियोगिता में एक स्वर्ण और कांस्य पदक के साथ उन्होंने इस सूनेपन को खत्म किया।

2014 में ग्लासगो काॅमनवेल्थ गेम से पहले विश्व चैंपियनशिप से चूकने के बाद एक बार फिर बुरा वक्त अपूर्वी के सामने था।

इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में अपूर्वी ने विश्व चैंपियनशिप से चूक जाने के बाद आए अपने करियर के बुरे दौर के अनुभव को साझा किया। वो एक ऐसा वक्त था जिसने अपूर्वी को मानसिक और शारीरिक तौर पर कमजोर बना दिया था। उनके टखने की चोट ने भी उन्हें मानसिक तौर पर तनाव दिया। उन्होंने इस बात को भी स्वीकारा की इंटरनेशनल करियर के खत्म हो जाने के डर से वो रोज रोती भी थीं। हर टूर्नामेंट में उनका साथ देने वाली उनकी मां ने उनके इस बुरे वक्त में भी हौसला दिया। वो याद करते हुए कहती हैं कि ‘‘मेरी मां ने मुझे हमेशा काॅमनवेल्थ खेलों की तरफ ध्यान देने के लिए कहा।’’

और उसने ऐसा किया भी। अपने पूरे परिवार और दोस्तों के सामने चंदेला परिवार की इस लड़की ने फाइनल मुकाबले में 206.7 का स्कोर करते हुए अपना पहला स्वर्ण पदक देश के लिए जीता। काॅमनवेल्थ खेलों के बाद उसमें कुछ बदलाव आए।

स्वभाव से कम बोलने वाली इस लड़की को भारतीय शूटिंग सर्कल, केवल एक संभावित निशानेबाज के रूप में देखता था। इस ‘संभावित’ नाम के टुकड़े-टुकड़े पिछले साल तब हुए जब उनकी पदक तालिका में एक-एक करके पदक जुड़ते गए। केरल में आयोजित 35वें नेशनल गेम्स में अयोनिका पाॅल के साथ हुए शूट आॅफ में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। एक कांस्य के साथ उनके साल की शुरूआत धीमी रही।

अप्रैल माह के आगमन के साथ ही दक्षिण कोरिया में चल रहे आईएसएसएफ विश्व कप का अंत उन्होंने पोडियम में जगह बनाकर किया। इसके साथ ही वो पहली महिला निशानेबाज तथा भारत की दूसरी निशानेबाज बनी जिसने रियो ओलंपिक में अपनी जगह बनाई।

अंतिम दौर के तनावपूर्ण माहौल में अपूर्वी ने अपने आप को शांत और राइफल को स्थिर रखते हुए 185.6 का स्कोर करके कांस्य पदक अपने नाम किया। अपने प्रदर्शन को सुधारते हुए आईएसएसएफ विश्व कप में केवल 0.6 अंक के बेहद करीबी अंतर से स्वर्ण पदक से चूकते हुए सिल्वर पदक अपने नाम किया। साल के अंत से पहले नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पर कब्जा जमाते हुए एक और पदक अपनी तालिका में जोड़ा।

नए साल के जश्न के दौरान और अपने जन्मदिन के अगले ही दिन अपूर्वी ने मौजूदा विश्व रिकाॅर्ड को तोड़ते हुए स्वीडिश कप ग्रां प्री में स्वर्ण जीता। अपने हुनर का प्रदर्शन करते हुए इस भारतीय ने फाइनल में 211.12 अंक हासिल किए और चीन की ओलंपिक गोल्ड मेडेलिस्ट यी सिलिंग का 211 अंको का रिकाॅर्ड ध्वस्त कर दिया। एक ही दिन के भीतर दोबारा सुर्खियां बटोरते हुए अपूर्वी ने एक अन्य स्वर्ण पदक और ‘बेस्ट शूटर’ का खिताब जीता।

वाॅल्थर राइफल और ‘लहराते ध्वज’ गीत के साथ जयपुर की ये खिलाड़ी महिला निशानेबाजी में भारत की एक बड़ी उम्मीद बन चुकी है।

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