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टोक्यो 2020 की प्रतियोगिता में लाये गए बदलावों से भारतीय निशानेबाज़ नाराज़

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© Getty Images

टोक्यो 2020 की प्रतियोगिता में लाये गए बदलावों से भारतीय निशानेबाज़ नाराज़

भारतीय निशानेबाजों ने इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन (ISSF) द्वारा टोक्यो में होने वाले अगले ओलंपिक्स में कम मुकाबलों को निर्धारित करने के निर्णय पर आपत्ति जताई है। पूर्व विश्व के न. 1 ट्रैप शूटर रंजन सिंह सोढ़ी ने सवाल उठाये है कि यह निर्णय 2020 के बजाय 2024 में क्यों नहीं लिया गया।

बुधवार को, ISSF ने पुरुष 50 मी पिस्तौल, 50 मी राइफल प्रोन और डबल ट्रैप, इन तीनों निशानेबाजी की प्रतियोगिताओं को 2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक्स में शामिल न करने का निर्णय लिया। ISSF की कार्यकारी समिति ने इस पर सर्वसम्मति जताई थी तथा बुधवार को, प्रशासनीय परिषद की बैठक में इस सुझाव पर अमल करने का फैसला लिया गया।

50 मी फ्री पिस्तौल प्रतियोगिता के दिग्गज जीतू राय ने इस फैसले पर असंतोष ज़ाहिर किया है। भारतीय खिलाड़ी हालांकि, इस साल, होने वाले विश्व कपों में भाग लेंगे।

"यह बहुत ही निराशाजनक है। मैं इस साल विश्व कप में फ्री पिस्तौल प्रतियोगिता में भाग लूँगा लेकिन टोक्यो ओलंपिक्स में सिर्फ एयर पिस्तौल पर ध्यान दूंगा," ESPN के अनुसार राय ने कहा।

ISSF ने हाल ही में इस बात की पुष्टि की थी कि यूँ तो इस बारे में कई खिलाड़ियों ने याचिका दी है, लेकिन वे इस मामले में कुछ ख़ास नहीं कर सकते।

रियो गेम्स में भारतीय टीम का हिस्सा रहने वाले प्रकाश नानजप्पा ने कहा कि अब टोक्यो में भाग लेने के लिए उन्हें रैपिड फायर में हिस्सा लेना होगा।  

"मैं एयर पिस्तौल के अलावा अब रैपिड फायर भी करूँगा। दोनों के लिए प्रशिक्षण काफी मुश्किल रहेगा क्योंकि दोनों काफी अलग खेल हैं लेकिन अब यही करना होगा," उन्होंने कहा।

यह निर्णय 2020 के टोक्यो ओलंपिक्स में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमिटी (IOC) के लिंग समानता की योजना को सफल बनाने के लिए लिया गया। प्रतियोगिताओं की संख्या (15) टोक्यो में भी उतनी ही रहेगी, हालांकि, पहले यह संख्या पुरुषों की प्रतियोगिताओं के पक्ष में थी और अब ISSF ने यह निर्धारित किया है कि महिला और पुरुष प्रतियोगिताओं में कोई भेद भाव नहीं होगा।

रंजन सिंह सोढ़ी इस 'अनचाहे' निर्णय को लागू करने की समीक्षा करते हुए कहते हैं कि यह फैसला 2024 में लिया जा सकता था।

"शूटिंग एक महंगा खेल है और अगर ऐसे बदलाव लाने ही थे तो 2024 के ओलंपिक्स में लाया जा सकता था," सोढ़ी ने कहा।

"काफी खर्चा हो चुका है और इस तरह से युवा खिलाड़ियों की उम्मीदों पर पानी फेरना ग़लत है मेरा करियर तो ख़त्म हो चूका है लेकिन उनका तो शुरू होने से पहले ही दिक्कतों में घिरा हुआ दिख रहा है"

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